नवजात शिशु की मृत्यु के मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही होता है —
क्या बच्चा जन्म से पहले मर गया था या जन्म के बाद?
यह सवाल सिर्फ़ मेडिकल नहीं, बल्कि कानूनी भी है। खासकर तब जब डॉक्टरी लापरवाही (medical negligence) या दहेज हत्या जैसे आपराधिक मामले जुड़े हों।
इसी सवाल का जवाब देता है फोरेंसिक मेडिसिन का एक क्लासिक टेस्ट — Hydrostatic Test (Flotation Test), जिसकी नींव है फेफड़ों में फंसी हुई वह हवा जो बच्चे की पहली सांस के साथ हमेशा के लिए अंदर चली जाती है।
आज इस पोस्ट में हम बिल्कुल जीरो से शुरू करके सबसे प्रोफेशनल और एग्जाम-रेडी स्तर तक जाएंगे। कोई भ्रम नहीं, कोई गलत टर्म नहीं — सिर्फ़ सटीक जानकारी।
1. जब बच्चा पहली बार सांस लेता है, तो होता क्या है?
जन्म से पहले बच्चे के फेफड़े पूरी तरह सिकुड़े हुए (collapsed/atelectatic) होते हैं। इसमें ऑक्सीजन की जगह फ्लूइड भरा होता है। जैसे ही बच्चा पहली बार रोता है या सांस लेता है: → वायुमंडलीय हवा (atmospheric air) फेफड़ों के लाखों alveoli में प्रवेश करती है। → फेफड़े पहली बार पूरी तरह फैलते (expand) हैं। → सांस छोड़ने पर ज्यादातर हवा बाहर निकल जाती है, लेकिन एक छोटा सा हिस्सा alveoli की दीवारों में हमेशा के लिए फंस जाता है। इसी फंसी हुई हवा को फोरेंसिक मेडिसिन में Minimal Air कहते हैं। (कई पुरानी किताबों में इसे Residual Air या Residual Volume भी लिखा जाता है, लेकिन सबसे सटीक और आधुनिक टर्म Minimal Air ही है।)
2. Residual Volume और Minimal Air में अंतर (सबसे ज्यादा कंफ्यूजन यहीं होता है)
Minimal Air नवजात शिशु के संदर्भ में प्रयुक्त शब्द है। यह वह वायु है जो शिशु की पहली साँस के बाद alveoli में स्थायी रूप से फँस जाती है। इसकी मात्रा बहुत कम होती है — केवल इतनी कि फेफड़े पानी में तैर सकें। इसे मापा नहीं जाता, बल्कि केवल इसकी मौजूदगी या अनुपस्थिति देखी जाती है (Hydrostatic Test के माध्यम से)। फोरेंसिक दृष्टि से इसका बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि इससे पता लगाया जाता है कि शिशु ने जन्म के बाद साँस ली थी या नहीं। मृत्यु के बाद यह वायु तब तक रहती है जब तक putrefaction (सड़न) शुरू न हो जाए।
निष्कर्ष: Residual Volume तो हर जीवित इंसान में हर सांस के बाद बचता है। लेकिन फोरेंसिक में हम जिस हवा की बात कर रहे हैं, वह Minimal Air है — जो सिर्फ़ एक बार पहली सांस लेने पर आती है और फिर कभी पूरी तरह बाहर नहीं निकलती।
3. Hydrostatic Test / Flotation Test — कैसे किया जाता है?
- पूरा फेफड़ा पानी में डालना
- फेफड़ों को टुकड़ों में काटकर अलग-अलग पानी में डालना (सबसे महत्वपूर्ण)
- पेट और आंतों का भी टेस्ट (क्योंकि कभी-कभी गैस वहां से भी आ सकती है)
Hydrostatic Test में Stillbirth और Live Birth का अंतर
Live Birth (जन्म के बाद मृत्यु) की स्थिति में फेफड़े फूले हुए (inflated), स्पंजी (spongy) और गुलाबी रंग के होते हैं। उनकी सतह पर क्रीज दिखाई देती हैं। ऐसे फेफड़े पानी में तैरने लगते हैं। इस स्थिति में Hydrostatic Test का परिणाम Positive माना जाता है। निष्कर्ष: शिशु ने कम से कम एक बार साँस अवश्य ली थी।
4. महत्वपूर्ण अपवाद — जो एग्जाम में 90% स्टूडेंट्स छोड़ देते हैं
Hydrostatic Test में गलत परिणाम (False Positive) की संभावनाएँ
- फेफड़ों की हिस्टोलॉजिकल जांच (alveoli में हवा की मौजूदगी + RBC की स्थिति)
- पेट-आंतों में गैस की जांच
- प्लेसेंटा और umbilical cord की जांच
अंतिम निष्कर्ष — आपको क्या याद रखना है?
- पहली सांस के साथ फेफड़ों में जो हवा हमेशा के लिए फंस जाती है — उसे फोरेंसिक में Minimal Air कहते हैं।
- इसी Minimal Air के कारण Live Birth के फेफड़े पानी में तैरते हैं।
- टेस्ट का नाम — Hydrostatic Test या Flotation Test
- Stillbirth → डूबते हैं, Live Birth → तैरते हैं
- लेकिन टेस्ट 100% सटीक नहीं — putrefaction और artificial respiration सबसे बड़े अपवाद हैं।
- आधुनिक फोरेंसिक में हिस्टोलॉजिकल जांच अनिवार्य है।

